उत्तर प्रदेश सरकार ने जनगणना-2027 और निपुण भारत मिशन को लेकर बड़ा संदेश दिया है। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नरेंद्र कश्यप ने डिजिटल स्व-गणना में भागीदारी की, वहीं बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने ‘निपुण भारत मिशन’ के जरिए शिक्षा व्यवस्था को तकनीकी और आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण अभियानों—जनगणना-2027 और निपुण भारत मिशन—को लेकर प्रदेशवासियों को बड़ा संदेश दिया। एक ओर पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नरेंद्र कश्यप ने डिजिटल माध्यम से स्व-गणना कर लोगों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की, वहीं दूसरी ओर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने निपुण भारत मिशन के माध्यम से प्रदेश की आधारभूत शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
डिजिटल जनगणना में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने की सहभागिता
उत्तर प्रदेश सरकार के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नरेंद्र कश्यप ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास 11 एन.डी.एम.आर. विक्रमादित्य मार्ग पर जनगणना-2027 के अंतर्गत आयोजित स्व-गणना (Self Enumeration) सत्र में भाग लिया। उन्होंने स्वयं डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर अभियान में सहभागिता की।
इस दौरान उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि देश और प्रदेश के समग्र, समावेशी एवं सुनियोजित विकास का आधार है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को इसे राष्ट्रीय दायित्व मानते हुए सक्रिय सहभागिता करनी चाहिए और सही व प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।

मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाया जा रहा है। इससे योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जातीय जनगणना समेत सभी आंकड़े भविष्य की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
21 मई तक मिलेगा स्व-गणना का विकल्प
सरकार द्वारा आम नागरिकों को 21 मई 2026 तक डिजिटल स्व-गणना का विकल्प दिया गया है। इसके बाद जनगणना कार्मिक घर-घर जाकर सूचीकरण का कार्य करेंगे। पहले चरण में भवनों और मकानों की गणना की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत गणना होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना से डेटा संग्रहण की प्रक्रिया तेज होगी और त्रुटियों में कमी आएगी। इससे सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में भी सहायता मिलेगी।
‘निपुण भारत मिशन’ से मजबूत होगी नई पीढ़ी की नींव
इसी दिन लखनऊ में आयोजित देवी संस्थान (Dignity Education Vision International) द्वारा आयोजित ‘फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (FLN)’ विषयक लीडरशिप कॉन्क्लेव में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार बच्चों में आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ‘निपुण भारत मिशन’ के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने का कार्य कर रही है। प्रारंभिक शिक्षा को किसी भी राष्ट्र की मजबूत नींव बताते हुए उन्होंने कहा कि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और आधुनिक शिक्षा पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी से बदल रही तस्वीर
मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश के हजारों विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं। इसके जरिए बच्चों को डिजिटल शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जा रहा है ताकि उनमें तकनीकी दक्षता और रचनात्मक सोच विकसित हो सके।
उन्होंने कहा कि निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों को भाषा, गणित और समझ विकसित करने के लिए नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों से प्रशिक्षित किया जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर बच्चा प्रारंभिक स्तर पर पढ़ने, लिखने और गणना करने में दक्ष बन सके।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप हो रहा बदलाव
कॉन्क्लेव में शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षकों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में चर्चा हुई कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल टूल्स के जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों के बीच शिक्षा की खाई को कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने माना कि यदि आधारभूत शिक्षा मजबूत होगी तो आने वाले समय में रोजगार, कौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
डिजिटल विकास और शिक्षा सुधार को साथ लेकर चल रही सरकार
राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना-2027 और निपुण भारत मिशन दोनों ही राज्य के भविष्य से जुड़े बड़े अभियान हैं। एक ओर सटीक जनगणना से योजनाओं को प्रभावी बनाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर शिक्षा सुधार के जरिए नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने की तैयारी की जा रही है।
सरकार की कोशिश है कि तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था के जरिए आम जनता तक विकास की सीधी पहुंच सुनिश्चित की जाए। डिजिटल जनगणना और डिजिटल शिक्षा मॉडल इसी दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं।
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