दिल्ली के इंदरलोक क्षेत्र में 1.5 करोड़ रुपये की हथियारबंद लूट की गुत्थी को दिल्ली पुलिस ने 11 दिन की लंबी अंतरराज्यीय जांच के बाद सुलझा लिया है। पुलिस ने कंपनी के कर्मचारी समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में 1.01 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, वारदात में इस्तेमाल बाइक और स्कूटी बरामद की गई है। जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी के अंदर काम करने वाले कर्मचारी ने ही कैश मूवमेंट की जानकारी अपराधियों तक पहुंचाई थी।
राजधानी दिल्ली के इंदरलोक इलाके में दिनदहाड़े हुई डेढ़ करोड़ रुपये की हथियारबंद लूट की वारदात का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि लूट की पूरी साजिश किसी बाहरी गैंग ने नहीं, बल्कि उसी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी की मदद से रची गई थी, जिसकी नकदी लूटी गई थी।
दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीमों ने 11 दिनों तक लगातार आठ राज्यों में अभियान चलाकर दो नाबालिगों सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार और हिरासत में लिया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 करोड़ 1 लाख 50 हजार रुपये की नकदी बरामद की है।
10 जून को हुई थी सनसनीखेज वारदात
मामला 10 जून 2026 का है। शिकायतकर्ता नितिन अपने सहयोगी करण के साथ स्कूटी पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये नकद दो बैगों में लेकर जा रहा था। जब दोनों जखीरा फ्लाईओवर के पास सराय रोहिल्ला क्षेत्र में पहुंचे, तभी बिना नंबर प्लेट की लाल पल्सर मोटरसाइकिल पर सवार दो बदमाशों ने उन्हें रोक लिया।
दोनों बदमाशों ने हेलमेट और मफलर से अपनी पहचान छिपा रखी थी। इनमें से एक आरोपी के हाथ में पिस्तौल थी। हथियार दिखाकर उन्होंने दोनों बैग लूट लिए और मौके से फरार हो गए।
घटना के बाद थाना सराय रोहिल्ला में मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई।

500 CCTV कैमरे, 4000 किलोमीटर पीछा और 11 दिन की जांच
वारदात की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस, स्पेशल स्टाफ और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीमों का गठन किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने लगभग 500 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी विश्लेषण और रूट मैपिंग के जरिए पता चला कि बदमाशों ने पश्चिम विहार से ही शिकायतकर्ता का पीछा शुरू कर दिया था।
जांच में सामने आया कि लूट में केवल मोटरसाइकिल ही नहीं बल्कि एक स्कूटी और एक मारुति स्विफ्ट कार का भी इस्तेमाल किया गया था। इससे साफ हो गया कि वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी।

पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर स्कूटी की पहचान की। यह स्कूटी एक नाबालिग के नाम पर पंजीकृत थी।
19 जून को पुलिस ने रघुबीर नगर नाले के पास से दो किशोरों को हिरासत में लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि स्कूटी उन्होंने वीरेश उर्फ वीरू को दी थी।
इसके बाद 20 जून को गीता कॉलोनी फ्लाईओवर के पास से वीरेश को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में वीरेश ने खुलासा किया कि उसने अपने साथी मनप्रीत उर्फ ट्विंकल और करण के साथ मिलकर पूरी लूट की साजिश रची थी।

कर्मचारी ने ही दी थी कैश की लोकेशन
जांच में जो तथ्य सामने आया उसने सभी को चौंका दिया।
करण वही व्यक्ति था जो वारदात के समय शिकायतकर्ता नितिन के साथ मौजूद था और कंपनी में कार्यरत था।
पुलिस के अनुसार, करण लगातार नकदी की लोकेशन, मूवमेंट और रूट की जानकारी अपने अपराधी साथियों को दे रहा था।
यानी जिस व्यक्ति पर कंपनी ने भरोसा किया, उसी ने लालच में आकर करोड़ों रुपये की लूट की साजिश रच डाली।
20 जून की शाम पुलिस ने करण को भी गिरफ्तार कर लिया।
पिता-पुत्र भी निकले साजिश में शामिल
पूछताछ में मनप्रीत उर्फ ट्विंकल ने बताया कि उसके पिता चरणजीत सिंह भी इस साजिश में शामिल थे।
इसके बाद 21 जून को विकासपुरी फ्लाईओवर के पास से चरणजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने वीरेश, करण और चरणजीत के कब्जे से 49.50 लाख रुपये बरामद किए।

जांच के दौरान पुलिस ने मारुति स्विफ्ट कार की पहचान की और इसके जरिए दो मुख्य आरोपियों धीर सिंह और विक्की उर्फ गंजा तक पहुंची।
वारदात के बाद दोनों आरोपी दिल्ली छोड़कर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब होते हुए जम्मू-कश्मीर पहुंच गए थे।
लेकिन दिल्ली पुलिस ने हार नहीं मानी।
लगातार 11 दिनों तक लगभग 4000 किलोमीटर तक पीछा करते हुए पुलिस ने दोनों पर नजर बनाए रखी। आखिरकार 22 जून को जब दोनों आरोपी जम्मू से वापस दिल्ली लौट रहे थे, तब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
इन दोनों के कब्जे से 52 लाख रुपये नकद बरामद हुए।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि करण ने लालच में आकर अपने नियोक्ता की नकदी से जुड़ी जानकारी वीरेश और मनप्रीत को दी थी।

इसके बाद वीरेश, मनप्रीत, विक्की और अन्य साथियों ने कई दिनों तक रूट की रेकी की।
करण द्वारा भेजी जा रही लाइव लोकेशन के आधार पर आरोपियों ने पश्चिम विहार से इंदरलोक तक शिकायतकर्ता का पीछा किया और सही मौके पर लूट को अंजाम दिया।
वारदात के बाद सभी आरोपी तिलक नगर में एकत्र हुए और लूटी गई रकम आपस में बांट ली।
गिरफ्तार आरोपियों में विक्की उर्फ गंजा (41 वर्ष) और धीर सिंह (43 वर्ष) पुराने अपराधी हैं। विक्की पर पहले से 9 और धीर सिंह पर 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं। दोनों नशे के आदी बताए जा रहे हैं।
अन्य आरोपियों में वीरेश उर्फ वीरू, करण, मनप्रीत उर्फ ट्विंकल और उसके पिता चरणजीत सिंह शामिल हैं। इसके अलावा दो किशोरों की भी भूमिका सामने आई है, जिन्होंने अपराधियों को मोटरसाइकिल और स्कूटी उपलब्ध कराई थी।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 1 करोड़ 1 लाख 50 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल, स्कूटी और कई मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह हाल के वर्षों में राजधानी में हुई सबसे बड़ी नकदी लूट की घटनाओं में से एक थी। तकनीकी जांच, मानव खुफिया तंत्र और अंतरराज्यीय समन्वय की मदद से इस जटिल मामले को सुलझाकर पुलिस ने पूरे गिरोह को कानून के शिकंजे में ला दिया है।
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