Saturday, June 27, 2026

दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा: नवजातों की खरीद-फरोख्त करने वाला अंतरराज्यीय गिरोह ध्वस्त, 13 आरोपी गिरफ्तार, 5 मासूम बच्चों को बचाया गया

दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक फैले संगठित बाल तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश। अस्पताल संचालिका, दलाल, सप्लायर, खरीदार और ट्रांसपोर्टर समेत 13 लोग गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेजों के जरिए कराई जा रही थी अवैध गोद लेने की प्रक्रिया।

Bahrampur , Latest Updated On - Jun 18 2026 | 14:05:00 PM
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दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑपरेशन यूनिट ने एक बड़े अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और 5 नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचाया गया है। जांच में अस्पताल संचालिका की संलिप्तता, फर्जी जन्म रिकॉर्ड और लाखों रुपये के अवैध लेनदेन का खुलासा हुआ है।

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राजधानी दिल्ली में बच्चों की तस्करी के एक ऐसे संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है जिसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस की ऑपरेशन यूनिट ने एक अंतरराज्यीय बाल तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और पांच नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचाया है।

यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक फैला हुआ था। पुलिस जांच में सामने आया है कि नवजात बच्चों को विभिन्न स्रोतों से हासिल कर निःसंतान दंपतियों को लाखों रुपये में बेचा जाता था। इस पूरे नेटवर्क में दलालों, सप्लायरों, खरीदारों और यहां तक कि एक अस्पताल संचालिका की भी भूमिका सामने आई है।

डिकॉय ऑपरेशन से हुआ खुलासा

मामले की शुरुआत 5 जून 2026 को हुई, जब सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि पहाड़गंज क्षेत्र में नवजात शिशु की अवैध बिक्री होने वाली है।

सूचना के आधार पर आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास पुलिस ने एक सुनियोजित डिकॉय ऑपरेशन चलाया। इस दौरान दो महिलाओं और एक पुरुष आरोपी ललित को गिरफ्तार किया गया, जो एक नवजात बच्चे को बेचने की कोशिश कर रहे थे।

पुलिस ने 4-5 दिन के नवजात बालक को सुरक्षित बचाया और डिकॉय ग्राहक द्वारा दिए गए 20 हजार रुपये टोकन राशि के रूप में बरामद किए।

इसके बाद पहाड़गंज थाने में एफआईआर संख्या 258/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पूछताछ में खुली पूरे नेटवर्क की कहानी

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान पता चला कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क है।

जांच में सामने आया कि मुख्य महिला तस्कर विभिन्न राज्यों से नवजात बच्चों की व्यवस्था करती थी। राजस्थान और गुजरात से बच्चों की सप्लाई करने वाले प्रमुख आरोपी सायबाभाई घमार उर्फ कालिया की पहचान की गई।

गिरोह में शामिल विपिन नामक व्यक्ति ड्राइवर के रूप में काम करता था और बच्चों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करता था।


अस्पताल संचालिका की भूमिका ने बढ़ाई गंभीरता

जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू दिल्ली के बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की संचालिका महिला डॉक्टर की गिरफ्तारी रही।

पुलिस के अनुसार अस्पताल का इस्तेमाल तस्करी कर लाए गए बच्चों को रखने, संभावित खरीदारों की पहचान करने और अवैध गोद लेने की प्रक्रिया को वैध दिखाने के लिए किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के जरिए फर्जी जन्म प्रमाण, डिलीवरी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे ताकि बच्चों को खरीदारों का जैविक बच्चा दिखाया जा सके।

कैसे काम करता था गिरोह?

पुलिस जांच के अनुसार गिरोह कई स्तरों पर काम करता था।

  • सप्लायर विभिन्न राज्यों से नवजात बच्चों की व्यवस्था करते थे।
  • दलाल खरीदारों की तलाश करते थे।
  • परिवहनकर्ता बच्चों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाते थे।
  • अस्पताल और अन्य सहयोगी फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे।
  • इसके बाद बच्चों को निःसंतान दंपतियों को सौंप दिया जाता था।

पूरी प्रक्रिया को कानूनी गोद लेने जैसा दिखाने की कोशिश की जाती थी।

लाखों में होता था बच्चों का सौदा

जांच में पता चला कि नवजात बच्चों को 1.5 लाख से 2 लाख रुपये में खरीदा जाता था।

इसके बाद उन्हें 6 लाख से 8 लाख रुपये तक में बेचा जाता था।

कुछ मामलों में एक बच्चे की बिक्री लगभग 6 लाख रुपये में और दो अन्य बच्चों की बिक्री लगभग 9 लाख रुपये में किए जाने की जानकारी सामने आई है।

गुजरात से पकड़ा गया मास्टर सप्लायर

तकनीकी निगरानी और लगातार पीछा करने के बाद पुलिस ने 17 जून को गुजरात से सायबाभाई घमार उर्फ कालिया को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार वही इस नेटवर्क का प्रमुख सप्लायर था और राजस्थान व गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों से नवजात बच्चों की व्यवस्था करता था।

 

पुलिस ने कुल पांच नवजात बच्चों को सुरक्षित बरामद किया है।

  • एक नवजात बालक दिल्ली से
  • दो बच्चे (एक लड़का और एक लड़की) ग्वालियर, मध्य प्रदेश से
  • दो बच्चे पानीपत, हरियाणा से

इनमें से चार बच्चे आदिवासी समुदायों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

बरामदगी

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान—

  • 5 नवजात बच्चों को सुरक्षित बचाया
  • 20,000 रुपये टोकन राशि
  • 2,92,400 रुपये नकद
  • अस्पताल और जन्म रिकॉर्ड से जुड़े कई दस्तावेज

बरामद किए हैं।

सभी बच्चों को CWC के सुपुर्द किया गया

बचाए गए सभी पांच बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

कमेटी के निर्देशों के अनुसार बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जांच अभी जारी

दिल्ली पुलिस अब बच्चों के वास्तविक जैविक माता-पिता की पहचान करने में जुटी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार अभी और राज्यों तक पहुंच सकते हैं।

पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा बच्चों की बरामदगी संभव है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर दिखाया है कि बच्चों की तस्करी जैसे अपराध कितने संगठित तरीके से संचालित किए जाते हैं और इनके खिलाफ लगातार सतर्कता तथा कड़ी कार्रवाई कितनी जरूरी है।

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COMMENTS
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