भारत सरकार के 6 सहायक सचिव स्तर के IAS अधिकारियों ने ग्रेटर नोएडा में स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप, MMLH और MMTH परियोजनाओं का अध्ययन किया। इस दौरान निवेश, रोजगार और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।
ग्रेटर नोएडा एक बार फिर देश के औद्योगिक और शहरी विकास मॉडल के अध्ययन का केंद्र बना, जब मंगलवार को भारत सरकार में सहायक सचिव स्तर पर तैनात छह युवा IAS अधिकारियों का एक उच्च स्तरीय दल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पहुंचा। इस अध्ययन यात्रा का मुख्य उद्देश्य स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप, मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब (MMLH) जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की कार्यप्रणाली, निवेश मॉडल और रोजगार सृजन क्षमता को समझना था।
इस प्रतिनिधिमंडल में आयूषी प्रधान, बेंजो पी. जोस, फडतरे अनितेश अशोक, प्रिया रानी, सलोनी छाबड़ा और जुफिशन हक शामिल रहे। सभी अधिकारी मंगलवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे, जहां उनका स्वागत वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया। इसके बाद एक विस्तृत बैठक और प्रस्तुति सत्र आयोजित किया गया, जिसमें परियोजनाओं की रूपरेखा, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) एनजी रवि कुमार ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए बताया कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी केवल भूमि उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उस भूमि को रोजगार और निवेश के अवसरों में बदलना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों से अधिग्रहित भूमि का उद्देश्य केवल उद्योगों को स्थान देना है, ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिल सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
सीईओ ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे योजनाबद्ध तरीके से विकसित की गई औद्योगिक परियोजनाएं न केवल निवेश आकर्षित करती हैं, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार का आधार बनती हैं। उन्होंने युवा अधिकारियों को सलाह दी कि नीति निर्माण के समय हमेशा रोजगार सृजन को प्राथमिक लक्ष्य के रूप में देखा जाना चाहिए।
इसके बाद एसीईओ श्रीलक्ष्मी वी.एस. और एसीईओ प्रेरणा सिंह ने स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप, MMLH और MMTH परियोजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। प्रेरणा सिंह ने बताया कि इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप में अब तक 30 से अधिक बड़ी कंपनियों को भूमि आवंटित की जा चुकी है। इनमें से कई कंपनियां, जैसे हायर (Haier), पहले ही उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं के माध्यम से अब तक लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हो चुका है और करीब 23,000 युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। यह आंकड़ा न केवल ग्रेटर नोएडा की औद्योगिक क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सही योजना और क्रियान्वयन से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन संभव है।
एसीईओ श्रीलक्ष्मी वी.एस. ने टाउनशिप की तकनीकी और प्रबंधन सुविधाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यहां ऑटोमैटिक वेस्ट कलेक्शन सिस्टम, 24 घंटे निर्बाध बिजली और जल आपूर्ति, तथा अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो इसे एक आधुनिक औद्योगिक शहर बनाती हैं।
इसके अलावा मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) के तहत रेल, मेट्रो और बस टर्मिनल को एकीकृत करने की योजना पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि यह हब भविष्य में यात्रियों और माल परिवहन दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगा।
मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब (MMLH) के संदर्भ में भी विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। यह परियोजना उत्तर भारत के औद्योगिक नेटवर्क को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक के बाद सभी IAS अधिकारियों को परियोजना स्थलों का निरीक्षण भी कराया गया। अधिकारियों ने मौके पर जाकर निर्माण कार्यों और विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर का अवलोकन किया। इस दौरान IITGNL (IIT Greater Noida Limited) की टीम भी उपस्थित रही और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की।
यह अध्ययन यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं बल्कि एक ऐसा ज्ञानवर्धक अनुभव माना जा रहा है, जो भविष्य में नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ग्रेटर नोएडा का यह मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर एक सफल औद्योगिक विकास उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
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