Saturday, June 27, 2026

क्या आपातकालीन स्थिति में बचाई जा सकती है जान? GIMS ग्रेटर नोएडा ने स्वास्थ्यकर्मियों को सिखाई जीवन रक्षक तकनीकें

GIMS में बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट (BCLS) सर्टिफिकेशन कोर्स सफलतापूर्वक संपन्न, डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ को मिला आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण

Bahrampur , Latest Updated On - Jun 20 2026 | 14:02:00 PM
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ग्रेटर नोएडा स्थित जीआईएमएस में बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट (BCLS) सर्टिफिकेशन कोर्स का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में 20 से अधिक डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने कार्डियक अरेस्ट, श्वसन आपातकाल, सीपीआर, AED और चोकिंग जैसी गंभीर परिस्थितियों से निपटने की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया।

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 किसी भी अस्पताल में मरीज की जिंदगी बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है सही समय पर सही निर्णय और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी। कई बार कुछ सेकंड की देरी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) ने स्वास्थ्यकर्मियों की आपातकालीन चिकित्सा क्षमताओं को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट (BCLS) सर्टिफिकेशन कोर्स का सफल आयोजन किया।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों के कौशल को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों की जान बचाने की संभावनाओं को भी मजबूत करने वाला साबित हुआ।

कार्यक्रम का उद्घाटन जीआईएमएस के निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता द्वारा किया गया। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में केवल चिकित्सकीय ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और सटीक प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी उतनी ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर स्थितियों में शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षित हों और सही तकनीक का उपयोग करें तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।


20 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में 20 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया, जिनमें डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ तथा पैरामेडिकल कर्मी शामिल रहे। प्रतिभागियों को कार्डियक और श्वसन संबंधी आपातकालीन स्थितियों में प्रभावी हस्तक्षेप की तकनीकों का विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से विभिन्न परिस्थितियों से निपटने का अनुभव भी कराया गया।

डॉ. नाजिया नाज़िर के मार्गदर्शन में हुआ प्रशिक्षण

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एनेस्थीसिया विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व डॉ. नाजिया नाज़िर के मार्गदर्शन में विशेषज्ञ BCLS टीम ने किया।

विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक और प्रमाण आधारित (Evidence-Based) आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रियाओं की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान यह भी समझाया गया कि किसी मरीज को कार्डियक अरेस्ट या श्वसन संकट की स्थिति में किस क्रम में उपचार प्रदान किया जाना चाहिए।

BCLS और COLS के बीच अंतर को समझाया गया

कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि प्रतिभागियों को BCLS (Basic Cardiac Life Support) और COLS (Compression Only Life Support) के बीच अंतर को विस्तार से समझाया गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि किन परिस्थितियों में केवल छाती पर दबाव (Compression) देना पर्याप्त होता है और किन परिस्थितियों में पूर्ण कार्डियक लाइफ सपोर्ट प्रक्रिया अपनाना आवश्यक होता है।

इससे स्वास्थ्यकर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और सटीक निर्णय लेने में मदद मिलेगी।


AED के उपयोग और CPR की तकनीकों का कराया गया अभ्यास

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को Automated External Defibrillator (AED) के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।

AED एक ऐसा उपकरण है जो हृदय गति रुकने की स्थिति में मरीज को विद्युत झटका देकर हृदय की सामान्य धड़कन बहाल करने में मदद करता है।

विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को CPR (Cardio Pulmonary Resuscitation) की सही तकनीक सिखाई तथा चोकिंग (गले में भोजन या वस्तु फंसने) जैसी आपात स्थितियों से निपटने के व्यावहारिक तरीके भी बताए।

इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन के सहयोग से आयोजित हुआ कार्यक्रम

यह सर्टिफिकेशन कार्यक्रम इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन (IRCF) के सहयोग से आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को इस स्तर तक प्रशिक्षित करना था कि वे किसी भी गंभीर चिकित्सा आपातकाल की स्थिति में घबराए बिना आत्मविश्वास के साथ मरीज की सहायता कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी समय रहते उचित कदम उठाकर मृत्यु दर को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

मरीजों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता ने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में नियमित रूप से कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता लगातार बढ़ती रहे।

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।

GIMS ने फिर दिखाई उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता

BCLS सर्टिफिकेशन कोर्स का सफल आयोजन एक बार फिर यह साबित करता है कि GIMS ग्रेटर नोएडा केवल चिकित्सा शिक्षा का केंद्र नहीं है, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों की सुरक्षा और सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार कार्य कर रहा है।

संस्थान का यह प्रयास भविष्य में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की एक मजबूत टीम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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All Comments (11)
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