ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय में नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग के खिलाफ एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। स्कूल ऑफ डेंटल साइंस और छात्र कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नशा मुक्ति रैली में सैकड़ों छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। रैली का उद्देश्य युवाओं को नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश देना था।
आज जब देशभर में युवाओं के बीच नशीले पदार्थों की बढ़ती लत एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनती जा रही है, ऐसे समय में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसी दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय ने नशे के खिलाफ जनजागरण का अभियान छेड़ते हुए एक भव्य नशा मुक्ति रैली का आयोजन किया।
शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ डेंटल साइंस और छात्र कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस रैली में बड़ी संख्या में छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। रैली का उद्देश्य युवाओं को नशीली दवाओं के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और समाज में नशा मुक्त वातावरण के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना था।
बैनर, तख्तियों और नारों के साथ निकली जागरूकता रैली
विश्वविद्यालय परिसर से शुरू हुई इस रैली में छात्रों ने हाथों में जागरूकता संदेश लिखी तख्तियां और बैनर लेकर मार्च किया। "नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो", "युवा शक्ति, राष्ट्र शक्ति", "नशा मुक्त भारत हमारा संकल्प" जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।

रैली के दौरान विद्यार्थियों ने राहगीरों, स्थानीय नागरिकों और अपने साथी छात्रों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने लोगों को बताया कि नशीले पदार्थों का सेवन केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके परिवार, समाज और भविष्य पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है।
छात्रों ने लोगों से अपील की कि वे स्वयं भी नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके खतरों के प्रति जागरूक करें।
युवाओं को सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की जरूरत: डॉ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित गौतम बुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी ने युवाओं की भागीदारी को इस प्रकार के अभियानों की सबसे बड़ी ताकत बताया।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का भविष्य उसके युवाओं पर निर्भर करता है। यदि युवा जागरूक, जिम्मेदार और स्वस्थ होंगे तो राष्ट्र स्वतः ही मजबूत बनेगा।
डॉ. त्रिपाठी ने कहा, "हमारा कर्तव्य केवल छात्रों को अकादमिक रूप से सक्षम बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से भी सशक्त बनाना है। आज की यह रैली जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार युवा पीढ़ी के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थानों की भी समान भागीदारी आवश्यक है।

नशे का असर केवल व्यक्ति पर नहीं, पूरे समाज पर पड़ता है: पी.के. गुप्ता
शारदा विश्वविद्यालय के चांसलर पी. के. गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि नशे की समस्या केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती। इसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि नशे की लत व्यक्ति की सोच, व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती है। कई बार युवा गलत संगत, तनाव या अन्य कारणों से नशे के जाल में फंस जाते हैं और धीरे-धीरे अपराध की दुनिया की ओर बढ़ने लगते हैं।
पी. के. गुप्ता ने कहा, "नशा करने वाले व्यक्ति के साथ-साथ उसका परिवार भी मानसिक, आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना करता है। कई बार नशे की पूर्ति के लिए व्यक्ति अपराध करने से भी नहीं हिचकता। इसलिए हमें ऐसी परिस्थितियों को जन्म लेने से पहले ही रोकना होगा।"
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का यह अभियान युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें मानसिक एवं शारीरिक रूप से मजबूत बनाने का एक प्रयास है।
युवाओं में नागरिक चेतना विकसित करने की पहल
रैली का मुख्य उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं था, बल्कि छात्रों के भीतर सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिक चेतना की भावना विकसित करना भी था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युवा स्वयं नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान का हिस्सा बनते हैं, तो उसका प्रभाव समाज के विभिन्न वर्गों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचता है।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों को नशे के शारीरिक दुष्प्रभावों, मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर, पारिवारिक टूटन, आर्थिक नुकसान और अपराध से इसके संबंध के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शिक्षकों ने भी दिया संदेश
कार्यक्रम में स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ विशेषज्ञ मौजूद रहे। उन्होंने छात्रों को जीवन में सकारात्मक सोच, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
विशेषज्ञों ने कहा कि नशे की समस्या का समाधान केवल कानूनी कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए निरंतर जागरूकता, परामर्श, पारिवारिक सहयोग और सामाजिक भागीदारी आवश्यक है।
बड़ी संख्या में रहे मौजूद
इस अवसर पर डिप्टी सीएमओ डॉ. चन्दन सोनी, डॉ. भुवनेश कुमार, डीन रिसर्च डॉ. आर.सी. सिंह, स्कूल ऑफ डेंटल साइंस के डीन डॉ. हेमंत, एडमिशन डायरेक्टर डॉ. राजीव गुप्ता, डायरेक्टर पब्लिक रिलेशन डॉ. अजीत कुमार, डॉ. शांति नारायण, डॉ. करिष्ठा मैथ्यू, डॉ. ऋचा, डॉ. राशि सहित विभिन्न विभागों के डॉक्टर, फैकल्टी सदस्य और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प
रैली के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया। छात्रों ने वादा किया कि वे न केवल स्वयं नशे से दूर रहेंगे बल्कि अपने मित्रों, परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी इसके खिलाफ जागरूक करेंगे।
शारदा विश्वविद्यालय का यह प्रयास केवल एक रैली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह युवाओं के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक मजबूत संदेश बनकर उभरा। ऐसे समय में जब नशीले पदार्थों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, इस प्रकार के अभियान समाज को जागरूक और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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