शारदा विश्वविद्यालय के सेंट्रल इंस्ट्रुमेंटेशन फैसिलिटी (CIF) द्वारा एडवांस्ड समर ट्रेनिंग प्रोग्राम 2026 का शुभारंभ किया गया है। कार्यक्रम में छात्रों, शोधार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणात्मक मानकों और उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों के संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पीढ़ी को वैश्विक स्तर की तकनीकी दक्षता प्रदान करने की दिशा में शारदा विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के सेंट्रल इंस्ट्रुमेंटेशन फैसिलिटी (CIF) द्वारा "एडवांस्ड समर ट्रेनिंग प्रोग्राम 2026" का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया गया है। यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों, शोधार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान तकनीकों तथा उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों के संचालन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
1 जून 2026 से प्रारंभ हुआ यह कार्यक्रम 15 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं बल्कि अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में वास्तविक शोध गतिविधियों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धी वैज्ञानिक और औद्योगिक परिवेश में केवल पुस्तक आधारित ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि आधुनिक उपकरणों और अनुसंधान प्रक्रियाओं की गहरी समझ भी आवश्यक है।
कुलपति और शोध संकाय के डीन ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में शारदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिबाराम खारा तथा शोध संकाय के डीन प्रो. भुवनेश कुमार ने भाग लिया। दोनों शिक्षाविदों ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया।
उद्घाटन अवसर पर कुलपति प्रो. सिबाराम खारा ने कहा कि विज्ञान और अनुसंधान का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। ऐसे में छात्रों और शोधकर्ताओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत विश्लेषणात्मक मानकों और शोध कार्यप्रणालियों से परिचित कराएगा।

अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों पर मिलेगा प्रशिक्षण
एडवांस्ड समर ट्रेनिंग प्रोग्राम 2026 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रतिभागियों को कई अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों पर सीधे काम करने का अवसर मिल रहा है।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्र और शोधार्थी निम्नलिखित उपकरणों के संचालन, विश्लेषण और डेटा इंटरप्रिटेशन का प्रशिक्षण ले रहे हैं—
- यूवी-विज़िबल स्पेक्ट्रोफोटोमीटर (UV-Vis Spectrophotometer)
- एटॉमिक एब्जॉर्प्शन स्पेक्ट्रोस्कोपी (AAS)
- एक्स-रे डिफ्रैक्शन (XRD)
- हाई-परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (HPLC)
ये उपकरण आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, औषधि निर्माण, सामग्री विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, रसायन विज्ञान और खाद्य गुणवत्ता परीक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन तकनीकों की जानकारी भविष्य में शोध और उद्योग दोनों क्षेत्रों में छात्रों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण
कुलपति प्रो. सिबाराम खारा ने बताया कि कार्यक्रम का पाठ्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विश्लेषणात्मक मानकों और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं पर आधारित है।
फार्मास्युटिकल विश्लेषण के प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को यूनाइटेड स्टेट्स फार्माकोपिया (USP), ब्रिटिश फार्माकोपिया (BP) तथा इंडियन फार्माकोपिया (IP) के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्य करना सिखाया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान पैरासिटामोल, इबुप्रोफेन, एटेनोलोल और एल्बेंडाजोल जैसी दवाओं के विश्लेषण की प्रक्रियाओं को प्रयोगात्मक रूप से समझाया जा रहा है।
इससे प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि दवाओं की गुणवत्ता, शुद्धता और प्रभावशीलता का परीक्षण किस प्रकार किया जाता है।
खाद्य विश्लेषण के क्षेत्र में भी मिल रहा अनुभव
कार्यक्रम केवल फार्मास्युटिकल विश्लेषण तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता परीक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रतिभागियों को इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर स्टैंडर्डाइजेशन (ISO), ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS), AOAC इंटरनेशनल तथा फूड केमिकल्स कोडेक्स द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार खाद्य उत्पादों के परीक्षण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण के लिए बिस्कुट जैसे खाद्य उत्पादों को मॉडल सैंपल के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इससे प्रतिभागी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, पोषण संबंधी मानकों और सुरक्षा परीक्षणों की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझ पा रहे हैं।
शोधकर्ताओं के लिए व्यावहारिक अनुभव की अहमियत
शोध संकाय के डीन प्रो. भुवनेश कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। एक सक्षम शोधकर्ता बनने के लिए प्रयोगशाला आधारित अनुभव और उपकरणों की गहन समझ आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को उन वैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करेगा, जो भविष्य में स्वास्थ्य, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में सामने आएंगी।
उनके अनुसार, इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों को अनुसंधान की वास्तविक दुनिया से जोड़ते हैं और उन्हें नवाचार के लिए प्रेरित करते हैं।

अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल
एडवांस्ड समर ट्रेनिंग प्रोग्राम 2026 शारदा विश्वविद्यालय की उस दीर्घकालिक सोच का हिस्सा है, जिसके तहत संस्थान अनुभवात्मक शिक्षा, वैज्ञानिक नवाचार और शोध उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है।
विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योग और अनुसंधान जगत की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को ऐसे तकनीकी और विश्लेषणात्मक कौशल विकसित करने का अवसर मिल रहा है, जिनकी मांग आज फार्मास्युटिकल, बायोटेक्नोलॉजी, खाद्य उद्योग, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुसंधान संस्थानों में तेजी से बढ़ रही है।
डॉ. अतुल कुमार गुप्ता और डॉ. अफसर अली की महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम का समन्वयन सेंट्रल इंस्ट्रुमेंटेशन फैसिलिटी (CIF) के प्रमुख डॉ. अतुल कुमार गुप्ता के नेतृत्व में किया जा रहा है।
इसके साथ ही डॉ. अफसर अली द्वारा प्रतिभागियों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। दोनों विशेषज्ञों की सक्रिय भूमिका कार्यक्रम को प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
प्रतिभागियों को अनुसंधान की बारीकियों, प्रयोगशाला सुरक्षा मानकों और उपकरण संचालन की उन्नत तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है।
भविष्य के वैज्ञानिकों को तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम
शारदा विश्वविद्यालय का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक समर कोर्स नहीं बल्कि युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की एक व्यापक पहल है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती वैज्ञानिक प्रतिस्पर्धा और अनुसंधान आधारित उद्योगों की मांग को देखते हुए ऐसे कार्यक्रम छात्रों को न केवल रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें नवाचार और खोज की दिशा में भी प्रेरित करते हैं।
एडवांस्ड समर ट्रेनिंग प्रोग्राम 2026 के माध्यम से शारदा विश्वविद्यालय ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह शिक्षा, अनुसंधान और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रतिबद्ध है।
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