उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने लखनऊ में बड़ी कार्रवाई करते हुए 733 किलोग्राम गांजा बरामद कर दो तस्करों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ जो ओडिशा और आंध्र प्रदेश से गांजा लाकर उत्तर भारत में सप्लाई करता था।
उत्तर प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। 18 मार्च 2026 की देर रात लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में की गई एक सुनियोजित कार्रवाई में एसटीएफ ने 733 किलोग्राम अवैध गांजा के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया। इस गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 1.83 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
एसटीएफ को पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय एक संगठित गिरोह की सूचना मिल रही थी, जो बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त था। इसी क्रम में टीमों को सक्रिय किया गया और निगरानी बढ़ाई गई। पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष टीम लगातार सूचना संकलन में जुटी थी।
18 मार्च की रात करीब 1:45 बजे एसटीएफ को पुख्ता सूचना मिली कि एक कंटेनर में भारी मात्रा में गांजा लखनऊ लाया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने मोहनलालगंज क्षेत्र में घेराबंदी कर कार्रवाई की।
जैसे ही संदिग्ध कंटेनर (नंबर HR 55 W 3217) मौके पर पहुंचा, एसटीएफ टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान कंटेनर से 733 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ।
इसके अलावा आरोपियों के पास से 2 मोबाइल फोन भी जब्त किए गए, जो इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों से संपर्क का माध्यम थे।
पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों की पहचान इस प्रकार की है:
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विनोद कुशवाहा, पुत्र राजकरण कुशवाहा, निवासी ग्राम मर्दन नाका, थाना कोतवाली बांदा, जिला बांदा।
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जितेंद्र शिवहरे, पुत्र चेता शिवहरे, निवासी ग्राम नेवादा, थाना बिवार, जिला हमीरपुर।

पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि वे एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हैं, जो अवैध गांजा तस्करी में लिप्त है।
यह गिरोह मुख्य रूप से ओडिशा और आंध्र प्रदेश से उच्च गुणवत्ता का गांजा सस्ते दामों पर खरीदता था और फिर इसे उत्तर प्रदेश, बिहार सहित अन्य राज्यों में ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाता था।
गिरोह बेहद शातिर तरीके से तस्करी को अंजाम देता था। गांजे को कंटेनरों में छिपाकर लाया जाता था, ताकि किसी को शक न हो। लंबी दूरी तय करते हुए यह कंटेनर कई राज्यों से होकर गुजरते थे और अंततः उत्तर प्रदेश पहुंचते थे, जहां से इसे विभिन्न जिलों में सप्लाई किया जाता था।
इस पूरे ऑपरेशन में एसटीएफ की विशेष टीम ने अहम भूमिका निभाई। टीम ने न केवल सटीक सूचना जुटाई बल्कि सही समय पर कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त करने में सफलता हासिल की।
कार्रवाई के दौरान कई पुलिस अधिकारियों और जवानों ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, जो लंबे समय से इस गिरोह पर नजर बनाए हुए थे।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ थाना मोहनलालगंज, कमिश्नरेट लखनऊ में मुकदमा संख्या 104/2026 दर्ज किया गया है। इनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20/29/60 के तहत मामला दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है और नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में काम कर रही है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि देश में मादक पदार्थों की तस्करी किस हद तक संगठित और खतरनाक रूप ले चुकी है। ऐसे गिरोह न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं बल्कि समाज के युवाओं को भी नशे की गिरफ्त में धकेल रहे हैं।
एसटीएफ की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। 733 किलो गांजा की बरामदगी और अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा इस बात का संकेत है कि पुलिस तस्करों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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