भारत सिटी सोसायटी में तीन नाबालिग बहनों की सामूहिक आत्महत्या मामले में पुलिस जांच में नया मोड़ आया है। पिता चेतन के दावों की परतें खुल रही हैं और कई बातें झूठ साबित हो रही हैं।
गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र स्थित भारत सिटी सोसायटी में तीन नाबालिग सगी बहनों की सामूहिक आत्महत्या के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। ताजा जांच में सामने आया है कि बच्चियों के पिता चेतन ने पुलिस और मीडिया को गुमराह करने की कोशिश की।
चेतन ने दावा किया था कि तीनों बेटियां पढ़ाई में फेल हो गई थीं, जिसके कारण उनकी पढ़ाई छुड़वाई गई। लेकिन पुलिस की जांच में यह बयान पूरी तरह गलत साबित हुआ है। बुधवार को पुलिस टीम शालीमार गार्डन स्थित ग्रीन फील्ड स्कूल पहुंची, जहां स्कूल मैनेजर अजीत सिंह ने जानकारी दी कि चेतन ने अगस्त 2018 में प्राची का कक्षा एक में, अप्रैल 2019 में निशिका का कक्षा तीन में और मई 2019 में पाखी का केजी में दाखिला कराया था।

एक साल बाद कोरोना काल में तीनों बच्चियों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया। कोरोना के बाद स्कूल खुलने पर बच्चियां वापस नहीं आईं और न ही परिवार ने स्कूल से ट्रांसफर सर्टिफिकेट लिया। जांच में सामने आया है कि आर्थिक तंगी के कारण उनकी पढ़ाई रुकवाई गई थी।
वहीं, कोरियन कल्चर से जुड़ाव को लेकर भी पिता के बयान पर सवाल खड़े हुए हैं। चेतन ने दावा किया था कि बेटियों की लत छुड़ाने के लिए दो मोबाइल बेचे, जबकि जांच में पता चला कि मोबाइल बेचना आर्थिक मजबूरी थी। बच्चियों का यूट्यूब चैनल भी पिता के मोबाइल से ही संचालित होता था।

पुलिस अब चेतन के बयानों की गहराई से जांच कर रही है और पूरे मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है।
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