ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिल्डर अभय कुमार को अवैध गिरफ्तारी का हवाला देते हुए तत्काल रिहा किया। रिमांड आदेश भी रद्द।
ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज की गड्ढे में डूबने से हुई मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एमजेड विशटाउन के निदेशक और बिल्डर अभय कुमार को अवैध गिरफ्तारी के आधार पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। गिरफ्तारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित अनिवार्य दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया, जिसे न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद-21 के उल्लंघन के रूप में गंभीर चूक माना।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने हाईकोर्ट में दाखिल हैबियस कार्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में लापरवाही अवैध है और इसे वैध नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने अभय कुमार के अरेस्ट मेमो में दर्ज क्लॉज-13 का पालन न होने को गंभीर चूक बताया।
उच्च न्यायालय ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्धनगर द्वारा 20 और 21 जनवरी 2026 को जारी किए गए रिमांड आदेश भी रद्द कर दिए। कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि जब गिरफ्तारी अवैध हो, तो उसके आधार पर पारित रिमांड आदेश भी स्वतः अवैध होंगे।
अभय कुमार के अधिवक्ता रिंकू तोंगड़ और राजीव तोंगड़ ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तारी से पूर्व न तो अरेस्ट मेमो की प्रति उपलब्ध कराई गई और न ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया।

कोर्ट ने इस दलील से सहमति जताते हुए पुलिस को गिरफ्तारी में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
इस फैसले के बाद बिल्डर अभय कुमार को देर रात रिहा कर दिया गया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की कसौटी पर खरा न उतरने वाली गिरफ्तारी वैध नहीं मानी जाएगी, और भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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