उत्तर प्रदेश में 25-26 मई की रात आए भीषण आंधी-तूफान ने कई जिलों की बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। हजारों पोल और कई हाईटेंशन लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं, लेकिन ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा की लगातार मॉनिटरिंग और विभाग की त्वरित कार्रवाई से अधिकांश क्षेत्रों में कुछ ही घंटों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई।
उत्तर प्रदेश में 25 और 26 मई की रात आए भीषण आंधी-तूफान ने कई जिलों की बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। तेज हवाओं, भारी बारिश और तूफान के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में हाईटेंशन लाइनें टूट गईं, बिजली के टावर क्षतिग्रस्त हो गए और हजारों पोल गिर पड़े।
हालांकि इस बड़ी प्राकृतिक आपदा के बीच ऊर्जा विभाग की त्वरित कार्रवाई और वैकल्पिक स्रोतों से बिजली आपूर्ति बनाए रखने के प्रयासों ने लाखों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी।
ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा लगातार पूरी स्थिति की मॉनिटरिंग करते रहे और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिजली बहाली के कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
कई जिलों में प्रभावित हुई बिजली व्यवस्था
आंधी-तूफान का असर प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिला। सीतापुर, उन्नाव, देवीपाटन, बदायूं, बरेली, बस्ती, कुशीनगर, वाराणसी और देवरिया समेत कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।

तेज हवाओं के कारण कई महत्वपूर्ण हाईटेंशन लाइनों को भारी नुकसान पहुंचा।
विशेष रूप से —
- 400 केवी बरेली-उन्नाव लाइन सर्किट-I एवं II
- 220 केवी बदायूं-रोजा लाइन सर्किट-I एवं II
- 220 केवी बरेली-दोहना लाइन
- 220 केवी पारीछा-दुनारा (झांसी) लाइन
- 220 केवी साहूपुरी-राजा का तालाब (वाराणसी) लाइन
- बस्ती-खलीलाबाद 132 केवी नाथ नगर लाइन
जैसी कई प्रमुख लाइनें प्रभावित हुईं।
इन लाइनों के तार टूटने और टावर क्षतिग्रस्त होने से कई क्षेत्रों में अचानक बिजली आपूर्ति ठप हो गई।
1500 से ज्यादा बिजली पोल टूटे
ऊर्जा विभाग के अनुसार तूफान के कारण वितरण प्रणाली को भी भारी नुकसान पहुंचा।
प्रदेशभर में 33 केवी के कुल 139 सबस्टेशन प्रभावित हुए, जबकि लगभग 1500 बिजली पोल टूट गए या क्षतिग्रस्त हो गए।
कई इलाकों में रातभर अंधेरा छा गया था और लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ा।

युद्धस्तर पर शुरू हुआ बहाली कार्य
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ऊर्जा विभाग ने तुरंत युद्धस्तर पर राहत और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया।
विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूरी रात फील्ड में रहकर काम किया।
कई स्थानों पर तेज बारिश और कीचड़ के बीच कर्मचारियों ने टूटे तारों और पोलों को ठीक किया।
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा लगातार अधिकारियों से अपडेट लेते रहे और खुद पूरी स्थिति की समीक्षा करते रहे।
वैकल्पिक स्रोतों से जारी रही बिजली आपूर्ति
इतने बड़े प्राकृतिक व्यवधान के बावजूद विभाग ने वैकल्पिक स्रोतों से बिजली आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की।
ऊर्जा विभाग का दावा है कि इसी रणनीति के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं को न्यूनतम असुविधा हुई।
कई इलाकों में बैकअप नेटवर्क और वैकल्पिक फीडर के जरिए बिजली सप्लाई जारी रखी गई।

133 सबस्टेशन फिर से चालू
ऊर्जा विभाग की त्वरित कार्रवाई का असर यह रहा कि प्रभावित 139 सबस्टेशनों में से 133 की बिजली आपूर्ति अगले ही दिन सुबह तक बहाल कर दी गई।
बाकी 6 सबस्टेशनों पर भी तेजी से काम जारी है और विभाग ने जल्द आपूर्ति बहाल करने का दावा किया है।
अधिकांश क्षेत्रों में 24 घंटे के भीतर लौटी बिजली
सरकार के अनुसार प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में कुछ ही घंटों के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई थी, जबकि अन्य प्रभावित इलाकों में 24 घंटे के अंदर स्थिति सामान्य कर दी गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बावजूद बिजली व्यवस्था को तेजी से पटरी पर लाना विभाग की तकनीकी क्षमता और आपदा प्रबंधन की तैयारी को दर्शाता है।
“भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें” — ए.के. शर्मा
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने प्रदेशवासियों से संयम बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग भ्रामक खबरें और दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ी है।

मंत्री ने कहा कि ऊर्जा विभाग का लक्ष्य है कि प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलती रहे और किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाई जाए।
फील्ड कर्मचारियों की मेहनत बनी बड़ी ताकत
इस पूरे संकट के दौरान ऊर्जा विभाग के फील्ड कर्मचारियों की मेहनत भी चर्चा में रही।
रातभर तूफान और बारिश के बीच बिजलीकर्मी लगातार लाइनों की मरम्मत में जुटे रहे। कई स्थानों पर कर्मचारियों ने जान जोखिम में डालकर बिजली आपूर्ति बहाल की।
सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया से मिली राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए यदि त्वरित कार्रवाई न होती, तो कई जिलों में लंबे समय तक बिजली संकट बना रह सकता था।
लेकिन विभाग की तेजी, तकनीकी समन्वय और लगातार मॉनिटरिंग ने हालात को जल्द नियंत्रित कर लिया।
अब सरकार भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए बिजली अवसंरचना को और मजबूत बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।
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