Friday, June 12, 2026

भारत धर्मशाला नहीं, रामद्रोहियों के लिए कोई जगह नहीं" — लखनऊ से सीएम योगी का बड़ा संदेश, लव जिहाद और लैंड जिहाद पर भी दो-टूक चेतावनी

रामकथा महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता पर दिया बड़ा संदेश; कहा- भारत को तोड़ने वाली ताकतों से सावधान रहना होगा।

Bahrampur , Latest Updated On - Jun 09 2026 | 17:20:00 PM
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लखनऊ में आयोजित 9 दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने भारत के प्रति निष्ठा, राम के आदर्श, लव जिहाद, लैंड जिहाद, सामाजिक एकता और सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। साथ ही जगद्गुरु रामभद्राचार्य की साधना और योगदान की भी सराहना की।

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 राजधानी लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित सेवा अस्पताल परिसर में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा महोत्सव का मंगलवार को भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों के मन में भारत के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है तथा जो भारतीय संस्कारों और परंपराओं का सम्मान नहीं कर सकते, उनके लिए भारत की भूमि धर्मशाला नहीं हो सकती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम केवल एक धार्मिक आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि भारतीय जीवन दर्शन, संस्कृति और आदर्शों के प्रतीक हैं। जो व्यक्ति राम के आदर्शों को अपनाता है, उसका जीवन सफल होता है, जबकि राम से द्रोह करने वालों को इतिहास में कभी सम्मानजनक स्थान नहीं मिला।

राम नाम में जीवन की हर समस्या का समाधान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान श्रीराम का नाम भारतीय समाज को जोड़ने की शक्ति रखता है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक श्रीराम भारतीय एकता के सबसे बड़े सूत्र हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति और पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर देखा जाए तो हर भारतीय के जीवन में किसी न किसी रूप में राम के आदर्श मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि संतों ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को व्यक्तिगत नहीं बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता का प्रश्न माना था। यही कारण था कि सैकड़ों वर्षों तक संत समाज इस अभियान से जुड़ा रहा। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का राजनीतिक लाभ नहीं बल्कि सांस्कृतिक सम्मान की पुनर्स्थापना था।


491 वर्षों के संघर्ष का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लगभग 491 वर्षों तक चले संघर्ष के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2019 में ऐतिहासिक फैसला सुनाया और स्पष्ट किया कि जहां रामलला विराजमान हैं, वही वास्तविक रामजन्मभूमि है।

उन्होंने बताया कि न्यायालय ने अपने निर्णय में विभिन्न ऐतिहासिक साक्ष्यों, पुरातात्विक प्रमाणों और विद्वानों के विचारों को आधार बनाया। उन्होंने कहा कि स्वयं न्यायमूर्तियों ने भी माना कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सदियों तक अन्याय होता रहा।

लव जिहाद और लैंड जिहाद पर दी चेतावनी

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लव जिहाद और लैंड जिहाद के मुद्दे पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाज को इन चुनौतियों के प्रति जागरूक रहना होगा और एकजुट होकर उनका सामना करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामायण काल में भी ऐसी प्रवृत्तियां मौजूद थीं। उन्होंने रावण द्वारा माता सीता के अपहरण का उदाहरण देते हुए कहा कि नारी गरिमा की रक्षा और महिलाओं के सम्मान की सुरक्षा समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 में इस दिशा में कठोर कानून बनाया, लेकिन केवल कानून पर्याप्त नहीं है। समाज में व्यापक जागरूकता भी आवश्यक है।

इसी प्रकार भूमि कब्जों को लेकर उन्होंने कहा कि लैंड जिहाद जैसी गतिविधियों के खिलाफ भी समाज को सजग रहना होगा। खाली जमीनों पर अवैध कब्जों की प्रवृत्ति को रोकना समय की आवश्यकता है।


नकारात्मक शक्तियों से सतर्क रहने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब नकारात्मक शक्तियां प्रभावी हुई हैं, उन्होंने समाज को नुकसान पहुंचाया है। रामायण काल में ताड़का, मारीच, सुबाहु और खर-दूषण जैसे पात्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन तत्वों ने समाज और संस्कृति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था।

उन्होंने कहा कि आज भी ऐसी ताकतें जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास करती हैं। ऐसे समय में संत समाज और सकारात्मक शक्तियों का दायित्व और बढ़ जाता है कि वे समाज को जोड़ने का कार्य करें।

मारीच और शकुनि के उदाहरण से किया कटाक्ष

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने रामायण और महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत संगति व्यक्ति को विनाश की ओर ले जाती है। उन्होंने मारीच और शकुनि का उदाहरण देते हुए कहा कि परिवार और रिश्तों का महत्व तभी है जब वे सही दिशा दिखाएं, अन्यथा गलत मार्ग पर ले जाने वाले संबंध समाज के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के योगदान की सराहना

मुख्यमंत्री ने रामकथा का वाचन कर रहे जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की विशेष प्रशंसा की।


उन्होंने कहा कि चित्रकूट में स्थापित दिव्यांग विश्वविद्यालय उनके संकल्प और समाज सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

सीएम योगी ने कहा कि जीवन की तमाम कठिनाइयों के बावजूद रामभद्राचार्य ने हार नहीं मानी और समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि उनकी साधना, विद्वता और सेवा भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

राम की संगति में पूज्य बने हनुमान और विभीषण

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम की संगति में आने के बाद हनुमान और विभीषण जैसे पात्र पूजनीय बन गए। यह दर्शाता है कि अच्छे विचार और श्रेष्ठ संगति व्यक्ति के जीवन को बदल सकती है।

उन्होंने कहा कि मध्यकाल में गोस्वामी तुलसीदास ने समाज को एकजुट करने का कार्य किया था और आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य कर रहे हैं।

समापन में राष्ट्र कल्याण की कामना

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि रामकथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने का माध्यम है। यदि समाज श्रीराम के आदर्शों का थोड़ा सा भी अनुसरण कर ले तो व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

रामकथा महोत्सव के समापन समारोह में विधायक नीरज बोरा सहित बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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