मऊ की बंद पड़ी परदहा मिल को नया जीवन देने की तैयारी तेज हो गई है। मंत्री ए.के. शर्मा ने निरीक्षण कर 85 एकड़ में औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में दशकों से बंद पड़ी परदहा मिल अब एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से वीरान पड़ी इस मिल को अब विकास के नए केंद्र के रूप में तैयार करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने अपने मऊ दौरे के दौरान परदहा मिल परिसर का निरीक्षण किया और इसे आधुनिक औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करने की योजना को गति देने के निर्देश दिए।
मंत्री ए.के. शर्मा ने उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर पूरे परिसर का स्थलीय जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वहां चल रही तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि औद्योगिक संकुल विकसित करने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना मऊ के लिए केवल एक विकास योजना नहीं, बल्कि इसकी औद्योगिक पहचान को पुनर्जीवित करने का माध्यम बनेगी।
मंत्री ने बताया कि परदहा मिल की लगभग 85 एकड़ भूमि पर एक अत्याधुनिक औद्योगिक पार्क या क्लस्टर विकसित किया जाएगा। यह क्लस्टर आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और विभिन्न प्रकार की औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने के लिए उपयुक्त माहौल प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना मऊ जिले में आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगी और क्षेत्र को एक नए औद्योगिक नक्शे पर स्थापित करेगी।

ए.के. शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि हर हाथ को हुनर और काम मिले। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस औद्योगिक संकुल की योजना तैयार की जा रही है।” उन्होंने विश्वास जताया कि इस परियोजना के जरिए स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा और साथ ही छोटे उद्यमियों को भी अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिलेगा।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि औद्योगिक इकाइयों के आवंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सरल बनाया जाएगा। इसके लिए जल्द ही एक ऑनलाइन प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे उद्यमी बिना किसी जटिल प्रक्रिया के आवेदन कर सकेंगे और उन्हें आसानी से भूमि आवंटन मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार की संभावना खत्म होगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
उन्होंने “आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि यह औद्योगिक संकुल उस दिशा में एक मजबूत कदम होगा। इससे न केवल रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बाहरी निवेशकों को भी आकर्षित किया जा सकेगा। इसके परिणामस्वरूप मऊ की स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि परदहा मिल, जो वर्षों से बंद पड़ी थी और धीरे-धीरे खंडहर में बदलती जा रही थी, अब विकास के प्रतीक के रूप में उभरेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मऊ फिर से अपनी खोई हुई औद्योगिक पहचान को प्राप्त करेगा और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, उद्योग विभाग के अधिकारी, व्यापारी और स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि परदहा मिल के बंद होने के बाद क्षेत्र में रोजगार के अवसर कम हो गए थे, जिससे युवाओं को अन्य शहरों की ओर पलायन करना पड़ा। अब इस नई योजना से उन्हें अपने ही जिले में रोजगार मिलने की उम्मीद जगी है।
कुल मिलाकर, परदहा मिल को औद्योगिक हब में बदलने की यह पहल मऊ के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है। यदि यह योजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि पूरे क्षेत्र को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
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