मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेधावी छात्र सम्मान समारोह में टॉपर्स को सम्मानित किया, वहीं शिक्षा विभाग को बड़ा निर्देश देते हुए विद्यालय पुस्तकालयों के लिए खरीदी गई पुस्तकों की आपूर्ति और भुगतान का जिला स्तर पर सत्यापन कराने का फैसला लिया है।
उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार बड़े कदम उठा रहे हैं। सोमवार को राजधानी लखनऊ के लोकभवन सभागार में आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह में जहां मुख्यमंत्री ने विभिन्न शिक्षा बोर्डों के टॉपर्स, उनके अभिभावकों और प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया, वहीं दूसरी ओर सरकार ने विद्यालय पुस्तकालयों के लिए खरीदी गई पुस्तकों की आपूर्ति और भुगतान की जिलेवार जांच कराने का महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया।
एक तरफ प्रदेश के मेधावी छात्र-छात्राओं की उपलब्धियों का सम्मान हुआ, तो दूसरी तरफ शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि स्कूलों तक पहुंचने वाले शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ हो।
लोकभवन में गूंजती रहीं तालियां, मेधावियों का हुआ सम्मान
लोकभवन सभागार में आयोजित समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के विभिन्न बोर्डों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। समारोह के दौरान टॉपर्स को चेक, टैबलेट, प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किए गए।

मुख्यमंत्री ने सबसे पहले सीतापुर की छात्रा कशिश वर्मा को सम्मानित किया, जिन्होंने 97.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की। इसके बाद बाराबंकी की अंशिका वर्मा, सीतापुर की शिक्षा वर्मा, कन्नौज की सृष्टि और प्रतापगढ़ के रजनीश यादव को भी सम्मानित किया गया।
समारोह में सबसे अधिक चर्चा लखनऊ पब्लिक कॉलेज, राजाजीपुरम के शिवम अवस्थी की रही, जिन्होंने 99.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शानदार प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने उनके साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई दी।
इसके अलावा कानपुर की अनन्या गर्ग, श्रेष्ठी सिंह, गोमतीनगर के वैवस्वत नारायण दुबे, गाजियाबाद के दक्ष वासुदेवा, अश्विक जैन तथा बरेली की मानवी पटेल को भी उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
100 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्र बने समारोह का आकर्षण
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण तब आया जब कानपुर के शीलिंग हाउस स्कूल के छात्र ओजस्वित पसरीचा को 100 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि को असाधारण बताते हुए उनके माता-पिता और शिक्षकों को विशेष रूप से बधाई दी। पूरे सभागार ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया।

प्रदेश और जनपद स्तर के हजारों छात्रों को मिला सम्मान
समारोह में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, संस्कृत शिक्षा परिषद, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
प्रदेश स्तर पर शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को:
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1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि
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टैबलेट
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मेडल
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प्रशस्ति पत्र
प्रदान किए गए।
वहीं प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से जनपद स्तर के टॉप-10 में स्थान प्राप्त करने वाले 1459 मेधावी विद्यार्थियों को 21 हजार रुपये, मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है।
अब स्कूल लाइब्रेरी की किताबों की होगी जिलेवार जांच
इसी बीच योगी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। समग्र शिक्षा और पीएम श्री योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में चयनित परिषदीय विद्यालयों के पुस्तकालयों के लिए खरीदी गई पुस्तकों की आपूर्ति और भुगतान का विस्तृत सत्यापन कराया जाएगा।

शासन द्वारा सभी जिलों को निर्देश जारी कर कहा गया है कि चयनित प्रकाशकों और आपूर्तिकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरणों का स्थानीय अभिलेखों से मिलान किया जाए और प्रमाणित रिपोर्ट शासन को भेजी जाए।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का मानना है कि विद्यालयों में पुस्तकालयों को मजबूत बनाना केवल किताबें खरीद लेने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि खरीदी गई पुस्तकें वास्तव में विद्यालयों तक पहुंची हैं और उनका उपयोग विद्यार्थियों के हित में हो रहा है।
इसी उद्देश्य से पुस्तकों की आपूर्ति और भुगतान की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इससे यह भी पता चल सकेगा कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हुआ है या नहीं।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा विभाग में डिजिटल मॉनिटरिंग, ऑनलाइन ट्रैकिंग और डेटा आधारित निगरानी व्यवस्था को लगातार मजबूत किया गया है।
सरकार का मानना है कि शिक्षा से जुड़े प्रत्येक संसाधन का लाभ सीधे विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए। पुस्तक आपूर्ति और भुगतान के सत्यापन की यह प्रक्रिया भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस समीक्षा के बाद विद्यालय पुस्तकालयों को और बेहतर बनाने तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए भविष्य की योजनाएं तैयार की जाएंगी।
शिक्षा सुधार और मेधावियों का सम्मान—दोहरी रणनीति
एक तरफ मेधावी छात्रों को सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विद्यालयों में उपलब्ध कराए जा रहे शैक्षणिक संसाधनों की निगरानी कर शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। योगी सरकार का यह दोहरा अभियान स्पष्ट संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण संसाधनों और जवाबदेह व्यवस्था के माध्यम से विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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