लखनऊ में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जलशक्ति मंत्री ने जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई विस्तार, नलकूप, चेकडैम और भूजल संरक्षण के लिए प्रदेशव्यापी अभियान की घोषणा की।
किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने और जल संरक्षण को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार पूरे प्रदेश में एक व्यापक अभियान चलाएगी। यह घोषणा जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए की। बैठक का आयोजन जल निगम (ग्रामीण), राणा प्रताप मार्ग, लखनऊ में किया गया।

जलशक्ति मंत्री ने बताया कि जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों, विशेष रूप से बुंदेलखंड, में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और भूगर्भ जल संरक्षण के लिए उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। वर्ष 2017-18 से अब तक बुंदेलखंड में 1.37 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है। मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत 4,678 गहरे और 3,050 मध्यम गहरे नलकूपों का निर्माण कराया गया, जिससे किसानों को पूरे वर्ष सिंचाई सुविधा मिल रही है।

पथरीले और जलविहीन क्षेत्रों में अमृत कूप योजना के तहत 3,758 नए कूपों का निर्माण किया गया, जिससे पहले असिंचित भूमि भी खेती योग्य बन सकी। इसके साथ ही किसानों को 132 सोलर पंपसेट भी उपलब्ध कराए गए। मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा है, किसानों की आय में वृद्धि हुई है और क्षेत्र से पलायन पर भी प्रभावी रोक लगी है।
जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बुंदेलखंड में 724 पुराने चेकडैमों की मरम्मत, 868 नए चेकडैमों का निर्माण तथा 476 तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया है। भूजल रिचार्ज के लिए 739 शासकीय भवनों पर रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग स्थापित की गई है, जिसके परिणामस्वरूप बुंदेलखंड के 47 में से 25 विकासखंड सुरक्षित श्रेणी में आ चुके हैं।

बैठक में नमामि गंगे विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, जल निगम ग्रामीण के एमडी डॉ. राजशेखर, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक प्रभास कुमार सहित प्रदेशभर के अधिकारी उपस्थित रहे। प्रत्येक जिले के अधिशासी अभियंताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए कार्यों का प्रस्तुतीकरण भी दिया।
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