Bharat News 360 TV की विशेष पड़ताल में खुला UPPCL आगरा डिवीजन का टेंडर घोटाला—टेंडर पास कराने के बदले मोटी रिश्वत, बिचौलियों की संलिप्तता और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप। शिकायतकर्ता के पास मौजूद रिकॉर्डेड बयान, ऑडियो क्लिप्स और दस्तावेज इस घोटाले की पुष्टि करते हैं। हमारी टीम पर खबर रोकने के लिए दबाव बनाए जाने के प्रयास भी सामने आए। क्या यह सिर्फ भ्रष्टाचार है या कोई गहरी साजिश? जानिए पूरी सच्चाई हमारी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में।
उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन
लिमिटेड (UPPCL) के
आगरा डिवीजन से जुड़ा एक चौंकाने वाला भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसे Bharat News 360 TV ने 19 जून 2025 को पहली बार देश के सामने रखा था। हमारी
इन्वेस्टिगेशन टीम ने गहन पड़ताल और ग्राउंड रिपोर्टिंग के बाद इस घोटाले की अगली
परत को उजागर किया है—जिसमें सिर्फ रिश्वतखोरी ही नहीं, बल्कि अधिकारियों और बिचौलियों के बीच
गहरे गठजोड़ की आशंका जताई जा रही है।
खुलासा: भ्रष्टाचार
का खेल और योजनाबद्ध लूट
Bharat News 360 TV की टीम को मिले इनपुट्स के अनुसार,
UPPCL आगरा डिवीजन में
टेंडर प्रक्रिया को लेकर गड़बड़ियां लंबे समय से चल रही हैं। टेंडर पास कराने से
लेकर उसके मैनेजमेंट तक के हर स्तर पर मोटी रकम की मांग की जा रही है। आरोप है कि
ठेकेदारों से काम दिलाने के नाम पर लाखों-करोड़ों की मांग की जाती है।
हमारे
पास मौजूद रिकॉर्डेड बयानों और ऑडियो क्लिप्स में यह स्पष्ट रूप से सुना जा सकता
है कि टेंडर पास कराने के लिए कौन-कौन सी शर्तें रखी गईं, कितनी रकम मांगी गई और किन-किन
अधिकारियों का नाम इसमें लिया गया।
जमीनी हकीकत: जब टीम
पहुंची आगरा
जैसे
ही यह मामला हमारी इन्वेस्टिगेशन यूनिट तक पहुंचा, हमने बिना देरी किए आगरा का दौरा किया।
हमने उन सभी अधिकारियों से संपर्क साधा जिनके नाम शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए थे।
हालांकि उन्होंने पहले मिलने की हामी भरी, लेकिन जैसे ही हमने कैमरे के सामने जवाब देने को कहा, वे पीछे हट गए। कुछ अधिकारियों ने अगले
ही दिन अपने पहले दिए गए बयानों से ही पल्ला झाड़ लिया।
दबाव की राजनीति और
डर का माहौल
इस
खबर को रोकने के लिए हमारी टीम पर लगातार दबाव बनाया गया। हमें अनजान नंबरों से
कॉल आने लगीं। इतना ही नहीं, हमारी
अनुपस्थिति में हमारे पंजीकृत कार्यालय का दौरा भी किया गया। इस दौरान कार्यालय
परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में एक व्यक्ति की आवाज भी रिकॉर्ड हुई, जो यह संकेत देती है कि यह मामला
सामान्य नहीं है—यहाँ “दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।”
सवाल उठते हैं—क्या
सिर्फ घूसखोरी या सुनियोजित लूट?
इस
घोटाले में जो पैटर्न उभर रहा है, वह
सिर्फ व्यक्तिगत भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं लगता। सवाल उठता है—क्या यह अधिकारियों
और बिचौलियों के बीच सांठगांठ है? क्या
इस गठजोड़ के जरिए करोड़ों रुपये का सरकारी पैसा योजनाबद्ध तरीके से लूटा जा रहा
है?
शिकायतकर्ता
द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, व्हाट्सऐप
चैट्स, ऑडियो रिकॉर्डिंग और
लेन-देन से जुड़े साक्ष्य इस पूरे खेल को उजागर करते हैं। इसमें कई ऐसे टेंडर
शामिल हैं जो बस स्टैंड, पुल
और सरकारी भवन जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं—जिसका सीधा असर जनता
के हितों पर पड़ता है।
सिस्टम पर सवाल, जांच की मांग
Bharat News 360 TV यह स्पष्ट करना चाहता है कि हम इन
आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहे, लेकिन हमारे पास मौजूद विश्वसनीय स्रोतों और प्रमाणों के आधार
पर हम यह मांग ज़रूर करते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की
जाए।
यदि
ऐसे अहम सरकारी विभागों में पारदर्शिता नहीं होगी, तो कैसे देश विकास की ओर बढ़ेगा?
कैसे आमजन का भरोसा शासन-प्रशासन पर बना
रहेगा?
आगे क्या?
हमारी
इन्वेस्टिगेशन टीम इस प्रकरण पर निरंतर निगाह बनाए हुए है। जल्द ही हम जनता के
सामने लाएंगे:
·
रिकॉर्डेड बयान
·
ऑडियो साक्ष्य
·
वित्तीय दस्तावेज
·
और उन चेहरों को, जो इस घोटाले के सूत्रधार हैं
हमारा
वादा है—हर परत को खोलेंगे, हर
जिम्मेदार से जवाब माँगेंगे, और
हर प्रयास करेंगे ताकि सत्य जनता तक पहुँचे।
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