लखनऊ में आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों, MSME, FPO और सहकारिता के डिजिटलीकरण से यूपी की बदली अर्थव्यवस्था और अनलिमिटेड पोटेंशियल को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 का विमोचन करते हुए कहा कि डिजिटल गवर्नेंस ने उत्तर प्रदेश में ऋण व्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। पहले किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए ऋण लेने में 25–30 दिन लगते थे, लेकिन अब ई-केसीसी से मात्र 5 मिनट में ऋण उपलब्ध हो रहा है। 2026-27 के लिए कृषि ऋण लक्ष्य ₹3 लाख करोड़ तय किया गया है, जो पिछले वर्षों से 13% अधिक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से AI एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म की घोषणा की गई है और यूपी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में कई FPOs को सम्मानित किया गया। उन्होंने दिव्यांगजनों द्वारा संचालित कसया मिल्क प्रोड्यूसर FPO (1005 सदस्य) और मथुरा की 750 महिला सरसों उत्पादक कंपनी को रोल मॉडल बताया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले सहकारिता पर माफियाओं का कब्जा था और 16 जिला सहकारी बैंक डिफॉल्टर थे। आज 15 बैंक मुनाफे में हैं। MSME सेक्टर को ODOP योजना से नई पहचान मिली है। यूपी देश का पहला राज्य है जो MSME को ₹5 लाख सुरक्षा बीमा देता है। प्रदेश में 96 लाख MSME यूनिट्स हैं, जिनसे 3 करोड़ परिवार जुड़े हैं। ODOP के चलते निर्यात ₹84 हजार करोड़ से बढ़कर ₹1.86 लाख करोड़ हो गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूपी में 86% भूमि सिंचित है, 16 लाख ट्यूबवेल को मुफ्त बिजली, नहरों से मुफ्त सिंचाई और 1 लाख किसानों को सोलर पैनल दिए गए हैं। 2016 में ₹11.7 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था 2026 तक ₹36 लाख करोड़ पहुंच रही है। यूपी अब देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
अंत में सीएम योगी ने बैंकों से ऋण शर्तें सरल करने, कम ब्याज पर ऋण देने और ट्रेनिंग व वैल्यू एडिशन के जरिए किसानों, FPO, MSME और सहकारिता को मजबूत करने की अपील की।
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