जनता दर्शन से गणतंत्र दिवस परेड तक, बच्चों और जरूरतमंदों से सीएम योगी का आत्मीय संवाद उनकी संवेदनशील शासन शैली को दर्शाता है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम जहां अपराधियों के लिए भय का प्रतीक माना जाता है, वहीं बच्चों और कमजोर वर्ग के लिए वही नाम अपनत्व, ममता और भरोसे का पर्याय बन चुका है। नर्सरी में एडमिशन की जिद लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंची मासूम बच्ची हो या चॉकलेट मांगते नन्हे बच्चे—सीएम योगी के साथ बच्चों का यह सहज और निस्संकोच संवाद उनकी संवेदनशीलता की अनूठी झलक पेश करता है।
ऐसा ही दृश्य हाल ही में देखने को मिला, जब एक छोटी बच्ची ने मुख्यमंत्री को देखते ही सैल्यूट किया। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए न केवल उसका अभिवादन स्वीकार किया, बल्कि मन लगाकर पढ़ाई करने की सीख भी दी। यह बाल प्रेम केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके कोमल हृदय और सर्वसुलभ नेतृत्व की सजीव तस्वीर है।

‘जनता दर्शन’ में बच्चों से जुड़े कई प्रसंग चर्चा में रहे। लखनऊ की अनाबी अली ने अपने एडमिशन के लिए जिद की, एबीसीडी और कविता सुनाई और मुख्यमंत्री का दिल जीत लिया। मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे के मासूम जवाब पर मुख्यमंत्री का खिलखिलाकर हंसना भी इसी भाव को दर्शाता है।
सीएम योगी ने कानपुर की नन्ही मायरा, गोरखपुर की पंखुड़ी, मुरादाबाद की वाची और लखनऊ की अनाबी का स्कूल में दाखिला सुनिश्चित कराया। पंखुड़ी की फीस माफ कराई गई, वाची और मायरा के भविष्य के सपनों को संबल दिया गया। वहीं मेजर की बेटी अंजना भट्ट की शिकायत पर 24 घंटे में कार्रवाई कर यह संदेश दिया गया कि बच्चों और महिलाओं के मामलों में कोई ढिलाई नहीं होगी।

कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता और कैंसर पीड़ित बेटे को लेकर आई वृद्ध मां की मदद जैसे उदाहरण मुख्यमंत्री की ‘प्रदेश ही परिवार’ की सोच को मजबूत करते हैं। यही वजह है कि सीएम योगी आज केवल प्रशासक नहीं, बल्कि संवेदनशील जननेता के रूप में पहचाने जाते हैं।
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